कितना डिग्री बुखार होने पर आदमी मर जाता है?HealthPlanet

Posted on Mon 28th Nov 2022 : 16:35


ये तापमान तो जान ले लेगा
बुखार। 100 डिग्री फारेनहाइट पारा चढ़ते ही मरीज परेशान होने लगता है। अगर बुखार 103 डिग्री फारेनहाइट पहुंचा तो मरीज ही नहीं, बल्कि पूरा परिवार परेशान और डॉक्टर की क्लीनिक तक पहुंच जाता है। इसके बाद अगर दो डिग्री भी बुखार बढ़ा तो मतलब डॉक्टर ने सीरियस बता कर हॉस्पिटल में एडमिट किया। इतने टेंप्रेचर में न सिर्फ मरीज कोमा में जा सकता है, बल्कि उसकी जान भी जा सकती है इसलिए थोड़ा होशियार हो जाइये। क्योंकि सूरज को बुखार चढ़ चुका है। कहीं उसका साइड इफेक्ट आप पर नजर न आए, इसलिए सावधानी जरूरी है। इस समय सूरज को 111.2 डिग्री फारेनहाइट बुखार चढ़ा है। इतने टेंप्रेचर में अगर ह्यूमन बॉडी लगातार रही तो हीट स्ट्रोक होने के साथ कोमा में जाने की संभावना बढ़ जाती है

सूरज की सुर्ख आंखों ने मौसम के मिजाज को हॉटी बना दिया है। लगातार बढ़ते टेंप्रेचर से अब न सिर्फ माथे से पसीना निकल रहा है और न ही चेहरा झुलस रहा है, बल्कि छोटी सी लापरवाही जिंदगी की दुश्मन बन सकती है। सीनियर फिजीशियन डॉ। सुधांशु शंकर ने बताया कि सिर के पीछे वाले हिस्से में एक जगह हाइपोथैलमस होती है। यह बॉडी के टेंप्रेचर को कंट्रोल करती है जिससे बॉडी पूरी तरह वर्क करती है, मगर इतने अधिक टेंप्रेचर के लगातार टच में रहने से यह हिस्सा अनकंट्रोल हो सकता है। इससे अचानक बॉडी का टेंप्रेचर बढ़ना शुरू हो जाता है। डॉ। सीपी मल्ल ने बताया कि शरीर के थर्मोरेगुलेटरी सेंटर के फेल हो जाने पर शरीर बहुत तेजी से हीट करता है और तेज बुखार आ जाता है। हाई फीवर से कई समस्याएं अचानक बढ़ जाती है। जो जानलेवा भी हो सकता है।

बिना आग उबल रहा पानी

टेंप्रेचर लगातार बढ़ रहा है। माथे से निकलता पसीना और झुलसता चेहरा इसका सबूत है। बढ़ते टेंप्रेचर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर छत पर खुले बर्तन में रखे पानी से कोई अपने हाथ-पैर धो लें तो उसके फफोले भी निकल सकते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस टाइम बॉडी कितनी तरह की प्रॉब्लम फेस कर रही है। एक्सपर्ट के मुताबिक 40 परसेंट से अधिक टेंप्रेचर पर गर्म हुए पानी से भी बॉडी में फफोले पड़ सकते हैं।

लगातार बढ़ रहा सूरज का बुखार

गर्मी आने के साथ सूरज का बुखार लगातार बढ़ता जा रहा है। एक माह पहले जहां दिन का टेंप्रेचर 38 डिग्री सेल्सियस था। मतलब तब बुखार नॉर्मल से अधिक 100.4 डिग्री फारेनहाइट था। मगर धीरे-धीरे पारे का हॉट मिजाज बढ़ता गया और टेंप्रेचर 44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मतलब 111.2 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच गया है। जबकि 105 डिग्री फारेनहाइट से अधिक फीवर होने पर मरीज के कोमा में जाने या मौत होने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं पारे का मिजाज 113 डिग्री फारेनहाइट होने से खतरा लगातार मंडरा रहा है। लगातार इस टेंप्रेचर में रहने से हीट स्ट्रोक का चांस कई गुना बढ़ जाता है।

बढ़ते टेंप्रेचर में सावधानी है जरूरी

- जरूरी काम होने पर ही दोपहर में घर से निकलें।

- घर से निकलने के पहले खूब पानी पी लें।

- चेहरे और सिर को ढक कर रखें।

- अगर बाइक से जा रहे हैं तो हेलमेट जरूर पहनें।

- लंबी दूरी तय करनी है तो बीच-बीच में रुक कर पानी पीते रहें।

- बासी खाना न खाएं। मतलब सुबह की बनी हुई चीज का इस्तेमाल शाम को न करें।

- दोपहर में अधिक मेहनत वाले काम से परहेज करें।

- ऐसा काम न करें, जिसमें पसीना अधिक निकलता हो।

सिर के पीछे का हिस्सा बहुत नाजुक होता है। इस हिस्से को हाइपोथैलमस नाम से जाना जाता है। यह शरीर के तापमान को कंट्रोल करता है। अधिक टेंप्रेचर में ज्यादा देर तक रहने से इसके अनकंट्रोल होने का चांस बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में बॉडी का टेंप्रेचर अनकंट्रोल होकर बढ़ना शुरू हो जाता है जो खतरनाक हो सकता है। इससे हीट स्ट्रोक होने के साथ मौत भी हो सकती है।

डॉ। एस श्रीवास्तव, फिजीशियन

क्या है फारेनहाइट?

फीवर को नापने के लिए फारेनहाइट का इस्तेमाल करते हैं। एक डिग्री सेल्सियस में 1.8 को मल्टीप्लाई कर उसमें 32 जोड़ दिया जाए तो टेंप्रेचर फारेनहाइट में कंवर्ट हो जाता है। अगर 44 डिग्री सेल्सियस टेंप्रेचर चल रहा है तो मतलब 111.2 डिग्री फारेनहाइट टेंप्रेचर है।

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